लोहरदगा : जय श्रीराम समिति के लोहरदगा जिला समिति के अध्यक्ष-सचिव एवं कोषाध्यक्ष का विधिवत चुनाव संपन्न होने के बाद संगठन विस्तार के तहत केवल संरक्षक, सलाहकार एवं अन्य पदाधिकारियों का विस्तार किया गया था। इसी बीच कुछ असंतुष्ट तत्वों द्वारा व्यक्तिगत लाभ न मिलने के कारण संगठन के खिलाफ नकारात्मक माहौल बनाने और साजिश रचने की कोशिश सामने आ रही है। जय श्रीराम समिति के जिलाध्यक्ष सुनील अग्रवाल ने इसे संगठन की एकता और अनुशासन के विरुद्ध बताते हुए कहा कि बिना अध्यक्ष-सचिव एवं वरिष्ठ पदाधिकारियों की जानकारी के समिति कार्यालय में तथाकथित कोर कमेटी बनाना न केवल अनुचित है, बल्कि सदस्यों को भ्रमित करने वाला कदम भी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जय श्रीराम समिति सेवा, पारदर्शिता और समर्पण के सिद्धांतों पर चलती है, न कि स्वार्थ या पॉकेट मनी की संस्कृति पर। समिति के जिलाध्यक्ष ने दो टूक कहा कि ऐसे व्यवहार से न तो समिति का मनोबल टूटेगा और न ही सेवा कार्य प्रभावित होंगे। समिति पूरी मजबूती के साथ अपने उद्देश्यों पर आगे बढ़ती रहेगी। संगठन की प्रतिष्ठा और मूल भावना की रक्षा के लिए सभी पदाधिकारी और सदस्य एकजुट रहेंगे। गलत गतिविधियों और अफवाह फैलाने वालों पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी, ताकि संगठन का वातावरण स्वच्छ, सकारात्मक और ऊर्जावान बना रहे।
भ्रम फैलाने की साजिश का आरोप
सुनील अग्रवाल ने आरोप लगाया कि कुछ लोग जय श्रीराम समिति के निर्वाचित अध्यक्ष व सचिव को हटाने की मंशा से गलत नामों से बॉयलॉज तैयार करा रहे हैं तथा अब तक उसे सुधारने का प्रयास भी नहीं किया गया है। यही नहीं, समिति को जाली दिखाने, नगर व प्रखंड स्तर के लोगों को गुमराह करने, बिना सच्चाई बताए हस्ताक्षर करवाने और झूठी बातें फैलाने जैसी गतिविधियां समिति की सेवा भावना के पूरी तरह विपरीत हैं।
लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सम्मान जरूरी
सुनील अग्रवाल ने कहा कि जय श्रीराम समिति में किसी भी प्रकार का कार्य बगैर जिलाध्यक्ष और सचिव को जानकारी दिए करना पूरी तरह अनुचित है। यह स्थिति संगठनात्मक अनुशासन के खिलाफ है और एकता व कार्यशैली पर सवाल खड़े करती है। लोकतांत्रिक प्रक्रिया से चुने गए पदाधिकारियों का सम्मान करना प्रत्येक सदस्य का दायित्व है, क्योंकि चुनाव पारदर्शिता और सामूहिक निर्णय का प्रतीक होता है।
एक ही वैध संरचना मान्य
समिति नेतृत्व ने स्पष्ट किया कि पराजय या व्यक्तिगत असंतोष के कारण समानांतर समिति या कोर कमेटी बनाना संगठन को विभाजित करने जैसा है। संगठन में वही कमेटी और वही संरचना मान्य है, जो विधिवत बैठक, नियम और चुनावी प्रक्रिया के तहत गठित हुई हो। सभी सदस्यों से संगठन के हित में एकजुट होकर सेवा और जनकल्याण के कार्यों पर ध्यान केंद्रित करने की अपील की गई है।




